बिलासपुर पुलिस ने मारपीट के मामले में आर्म्स एक्ट की धाराएं हटाईं, जांच में चाकू से हमले की पुष्टि नहीं

बिलासपुर। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में वाहन खड़ा करने को लेकर हुए विवाद और मारपीट के मामले में पुलिस ने जांच के बाद आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 को प्रकरण से अलग कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, चिकित्सकीय रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में धारदार हथियार से हमला किए जाने की पुष्टि नहीं हुई।

पुलिस के अनुसार, 18 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे 27 खोली निवासी सत्यम सिंह (27) ने थाना सिविल लाइन में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वाहन खड़े करने की बात को लेकर विकास सिंह ठाकुर, बोदलू सिंह और अन्य लोगों ने अश्लील गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने तथा धारदार हथियार/चाकू से हमला करने का भी आरोप लगाया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। घटना के बाद आहत सत्यम सिंह का तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

मेडिकल रिपोर्ट में सामान्य चोट का उल्लेख

पुलिस के मुताबिक, चिकित्सकीय रिपोर्ट में सत्यम सिंह को सामान्य प्रकृति की चोट होना दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में धारदार हथियार से कटने या फटने जैसी चोट अथवा किसी शार्प ऑब्जेक्ट से चोट लगने का उल्लेख नहीं है।

विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य साक्षियों के बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार, साक्षियों के कथनों में वाहन खड़े करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच क्षणिक आवेश में झूमा-झटकी और गाली-गलौज होने की बात सामने आई।

पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्य और साक्षियों के बयानों के आधार पर घटना में किसी धारदार हथियार के इस्तेमाल या प्रदर्शन की पुष्टि नहीं हुई। इसी आधार पर मामले में लगाई गई आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 को पृथक कर दिया गया है।

पुलिस ने कहा है कि कुछ पोर्टल और समाचार माध्यमों में आर्म्स एक्ट की धाराएं हटाए जाने को लेकर बिना तथ्यात्मक पुष्टि के खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। पुलिस के अनुसार, इससे घटना और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। पुलिस ने सभी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से अपील की है कि किसी भी आपराधिक प्रकरण से संबंधित समाचार प्रकाशित करने से पहले पुलिस अथवा संबंधित अधिकृत स्रोत से तथ्यों की पुष्टि की जाए और प्रमाणित एवं तथ्यपरक जानकारी ही प्रकाशित की जाए।

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